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rajivupadhyay


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नव वर्ष की पूर्व संध्या पर भारत के लिए भाव

Posted On: 1 Jan, 2013  
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बालासाहेब ठाकरे की असीम लोकप्रियता क्यों ?

Posted On: 19 Nov, 2012  
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Nitish , Pakistan ,Battle of Buxar and Death of Rohem

Posted On: 14 Nov, 2012  
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अजहरुद्दीन कि रिहाई : देश फिर हुआ शर्मसार

Posted On: 8 Nov, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

पंडित जी, किसी को किसी भी भाषा से कोई प्रेम नहीं है हिन्दी से तो बिलकुल भी प्रेम नहीं है ,केवल पैसे से ही प्रेम है सबका! आज हिन्दी के नाम पर अलग अलग योजनाओं में पैसा बांटा जा रहा है, इसलिए हम हिन्दी हिन्दी गा रहे है,चार सालों में एक बार विशव हिन्दीसम्मेलनों में जाने के अवसर और खूब भत्ते ,विदेशों का भ्रमण क्या कम है ? इस माह इसमे जाने वाले बीमार होने पर जी उठेंगे क्योंकि अफ्रीका जो जाना है,अहिन्दी भाषी राज्यों को तथा इनमे चल रही फर्जी संस्थाओं को जो पैसा बांटा जा रहा है वह हिन्दी को हिन्दी बनाए रख रही है! आगरा के केंद्रीय हिन्दी संस्थान में करोरो रुपयों की बंदरबांट हो रही है,सो हिन्दी हमारी हिन्दी हो रही है.कहने का मतलब हम हिन्दी के पैसे से पेट भर रहे है,हमें पैसे से प्यार है ,हिन्दीसे नहीं ! बाकी आप पी एम् के हिन्दी कवी होने और अब के अर्थ शास्त्री होने और गृह मंत्री के हिन्दी न जानने से इन सब का कोई मतलब है ही नहीं! हिन्दी के नाम पर नौकरिया मिल रही हैं हिन्दी रोटी पाने का सरल साधन बना हुआ है हमारे पेट पर लात न मारीये ,पंडित जी!!! हिन्दी की कुर्सी आड़ में जनता जाए भाड़ में!

के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani

                              श्री दिनेश जी  कांग्रेसी वोटर कांग्रेसी ही रहेंगे और भाजपाई वोटर भाजपाई ही रहेंगे. हार या जीत फ्लोटिंग वोट के बदौलत होती है. जो फ्लोटिंग वोट इस बार नरेन्द्र मोदी जी को पीएम बनाकर इस राष्ट्र को कांग्रेस से मुक्ति दिलाते बड़े चालाकी से उन वोटो को अब अरविन्द केजरीवाल की वोट कटुआ पार्टी काटेगी. और फीर से कांग्रेस का शासन ले आने की उनकी वोट कटुआ पार्टी अवश्य कोशिस करेगी. भावनात्मक होना ठीक है पर उस भावना में बहकर खुद का गलत काम में इस्तेमाल कराना ठीक नहीं है. टीम अन्ना के पार्टी को वही लोग वोट देंगे जो पोलिटिकली इम्मैच्योर होंगे.टीम अन्ना वास्तव में चुनाव में विकल्प के रूप में आना चाहती है तो उसे कम से कम ५-६ वर्ष का वक़्त लेना चाहिए ... इतनी जल्दी केवल कांग्रेस को फायदा पहुचायेगा ... टीम अन्ना को सच्चाई उसी दिन जान लेना चाहिए था की इनके बड़े बड़े लीडर अनशन पर बैठे थे और इनको वह सपोर्ट करने वालो की संख्या एक हज़ार भी नहीं जुट पा रही थी. भला हो अन्ना जी का जो खुद अन शान पर बैठे तो ३-४ हज़ार लोग आ गए ... १२०००००००० जनसख्या के देश में ५००० लोगो का समर्थन वैसे ही है जैसे समुद्र में बूँद

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra




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